बायोगैस के घटक, प्रकार,उपयोग, क्षमता और लाभ
परिचय
बायोगैस मुख्यतः गोबर गोबर गैस कहीं वैज्ञानिक नाम है। बायोगैस एक स्वच्छ प्रदूषण रहित पर्यावरण मित्र एवं जलनशील गैसीय मिश्रण है बायोगैस में मुख्यतया मिथेन गैस 55 से 60 % कार्बन डाई ऑक्साइड 35 से 40 % एवं अल्प मात्रा में वाष्प पाई जाती है। बायोगैस एक जैव ईंधन है जो आवायवीय अपघटन से उत्पन्न होती है
बायोगैस संयंत्र लगाकर घर में भी अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन तथा भण्डारण किया जा सकता है। यह बहुत ही साधारण संयंत्र होता है जिसमें अपशिष्ट पदार्थ (सजीव बायोमास) जैसे गोबर, पेड़ की पत्तियां, फसलों के अपशिष्ट, हरी सब्जियों के अपशिष्ट, मानव अपशिष्ट, जलकुंभी,तेल निष्कासित खली आदि से बायोगैस का उत्पादन किया जा सकता है। बायोगैस से जुड़े सरकार समय समय पर कई कार्यक्रम चलाकर लोगों को जागरूक करने के लिए योजनाएं संचालित करती है जिसमें सब्सिडी भी प्रदान करती है।
मुख्य घटक –
- मीथेन (CH4), 55-60%
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) -35-40%
- हाइड्रोजन (H2) – 0-1%
- हाइड्रोजन सल्फ़ाइड (H2S) – 0-3%
- नाइट्रोजन (N2) – 0-10%
- ऑक्सीजन (O2) – 0-0.5%
- जल वाष्प (H2O)
- अमोनिया (NH3)
उपयोग
- खाना पकाने में उपयोग में लिया जाता है।
- इससे बिजली का उत्पादन किया जाता है।
- बायोगैस संयंत्र के अपशिष्ट से उर्वरक खाद के रूप में काम में लिया जाता है।
- परिवहन वाहनों में ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
बायोगैस के प्रकार
Compressed biogas(CBG)-
यह उन्नत और उच्च शुद्धता वाली बायोगैस (Co2,H2O और नमी हटाने के बाद) उच्च दबाव पर सम्पीड़ित बायोगैस प्राप्त होती है। सम्पीड़ित बायोगैस और प्राकृतिक गैस CNG के गुण समान होते है।
खामियां क्या है
गैसीय अवस्था में होने के कारण परिवहन में अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।
लिक्विफाइड बायोगैस (LBG)
बायोगैस से उत्पन्न मिथेन को जब माइनस 162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा होने के कारण द्रव अवस्था मे गैस प्राप्त होती है तो प्राप्त दरव गैस तरल ईंधन के रुप में होता है। तरल ईंधन का ऊर्जा घनत्व अधिक होने के कारण भंडारण के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता नहीं होती। तरल मिथेन का ऊर्जा घनत्व गैसीय मिथेन के ऊर्जा घनत्व से लगभग 600 गुणा अधिक होता है।
लाभ
सड़क परिवहन में लागत को कम कर वैकल्पिक ईंधन बन सकता है।
बायोगैस कार्यक्रम का क्षेत्र/स्कोप
ग्रीन एनर्जी के रूप से इसका क्षेत्र विस्तृत है, भविष्य में नई तकनीक और आविष्कार से इसका अनविकरणीय ईंधन के विकल्प के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है , बायोगैस कार्यक्रम का क्षेत्र व्यापक निम्न रूप में है _
ऊर्जा उत्पादन
ऊर्जा उत्पादन करना ही बायोगैस का प्रमुख उद्देश्य है। एक घन मीटर बायोगैस में लगभग 470 किलो कैलोरी ऊर्जा होती है। एक घन मीटर बायोगैस की ऊर्जा 0.6 घन मीटर प्राकृतिक गैस CNG, 3.6 घन आइसो ब्यूटेन (LPG) और 0.7 लीटर गैसोलीन के समकक्ष होती है।एक घन मीटर बायोगैस 0.5 यूनिट बिजली के बराबर होती है।
पर्यावरण संरक्षण
बायोगैस जैविक ईंधन होने के कारण पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल होती है क्योंकि इससे अपशिष्ट एवं खाद निपटान, जल प्रदूषण, कार्बन डाई ऑक्साइड Co2 एवं मिथेन जैसी ग्रीन हाउस गैसों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण है।
इसका उत्पादन विभिन्न कारखानों जैसे कपास, पेपर , सार्वजनिक कूड़ा करकट, बूचड़खानों, सीवेज आदि अपशिष्ट से ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
कृषि क्षेत्र में उपयोग
बायोगैस संयंत्र से बाहर निकलने वाले पचित घोल को जैविक खाद कहते है। यह घोल पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व ओर नाइट्रोजन से समृद्ध होती है नाइट्रोजन घुलनशील अवस्था में होती है जो पौधों द्वारा अधिक मात्रा में अवशोषित कर ली जाती है, इसमें रोड़ी खाद की तुलना में तीन गुणा अधिक फास्फोरस और पोटाश संरक्षित रहता है और अन्य सुक्ष्म तत्व भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। इस खाद से फ़सल का उत्पादन लगभग 20 से 25 प्रतिशत बढ़ जाता है।
ग्रामीण क्षेत्र में विकास
ग्रामीण क्षेत्र में किसान पशु अपशिष्ट तथा फसलों के अवशेष से बायोगैस संयंत्र लगाकर बिजली का उत्पादन तथा भण्डारण के बिजली का घरेलू उपयोग कर सकता है तथा अधिक उत्पादन कर विक्रय कर मुनाफा कमा सकता है इससे लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
अपशिष्ट प्रबंधन
- बायोगैस का अपशिष्ट प्रबंधन में अहम योगदान है। यह जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलता है जिस से वातावरण में हानिकारक मीथेन उत्सर्जन को रोका जा सकता है जो ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करता है।। कचरे या जैविक अपशिष्ट का ऊर्जा में रूपांतरण करने से
- लैंडफिल पर दबाव कम करना
- संभावित भूजल संदूषण को कम करना
- पारंपरिक अपशिष्ट निपटान विधियों की आवश्यकता को न्यूनतम करना
इसके अलावा, बायोगैस उत्पादन प्रक्रिया का उपोत्पाद, जिसे डाइजेस्टेट के रूप में जाना जाता है, पर्यावरण अनुकूल उर्वरक के रूप में कार्य करता है, तथा मृदा स्वास्थ्य और कृषि स्थिरता को बढ़ाता है।
आर्थिक योगदान
ग्रामीण क्षेत्रों में यह एक अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में भी अपनाया जा सकता है , बायोगैस से बिजली उत्पादन कर आर्थिक लाभ लिया जाता है तथा बायोगैस संयंत्र से निकलने वाले पचित घोल जो जैविक खाद के रूप में बेचकर भी लाभ प्राप्त कर सकते है, क्योंकि जैविक खाद पौधों के लिये उपयुक्त होती है।
बायोगैस से सम्बंधित चुनौतियां
बायोगैस एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जिसकी भविष्य में अपार संभावनाएं दिखाई दे रही है, फिर भी इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं, जो निम्न प्रकार से हैं
तकनीकी सीमाएँ :
बायोगैस उत्पादन तकनीक अभी तक दक्षता के उस स्तर तक नहीं पहुँच पाई है जो इसे बड़े पैमाने पर सुलभ और लागत प्रभावी बनाती है। महत्वपूर्ण प्रगति की अनुपस्थिति प्राथमिक ऊर्जा स्रोत बनने की इसकी क्षमता में बाधा डालती है। पर्याप्त सरकारी निवेश की कमी भी इस क्षेत्र के विकास को धीमा कर देती है।
अशुद्धता की चिंताएँ :
शोधन और संपीड़न के बाद भी, बायोगैस में अशुद्धियाँ बनी रहती हैं जो वाहनों के लिए ईंधन के रूप में उपयोग किए जाने पर हानिकारक हो सकती हैं। इंजन घटकों के संभावित क्षरण से रखरखाव लागत बढ़ सकती है। हालाँकि, बायोगैस की संरचना इसे स्टोव, बॉयलर और लैंप जैसे घरेलू अनुप्रयोगों के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है।
तापमान संवेदनशीलता :
सौर और पवन जैसे अन्य नवीकरणीय स्रोतों की तरह, तापमान बायोगैस उत्पादन को प्रभावित करता है। अपशिष्ट पाचन के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया के लिए इष्टतम स्थिति 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास होती है। ठंडे मौसम में, बायोगैस की निरंतर आपूर्ति को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम : औद्योगिक बायोगैस संयंत्रों की उपयुक्तता काफी हद तक खाद्य अपशिष्ट और खाद जैसे कच्चे माल की प्रचुरता पर निर्भर करती है। यह कारक घने शहरी क्षेत्रों के बजाय ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों तक इसकी व्यवहार्यता को सीमित करता है।
